सावित्री देवी
( ३० मई, १९२३ – २ जनवरी, २००८)
आप स्वाधीनता संग्राम युग की ओजस्विनी लेखिका ,
कवयित्री श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान की वंशजा हैं. ३० मई, १९२३ को इलाहबाद के
निहालपुर गाँव में जन्म. शिक्षा-दीक्षा काशी के कमच्छा विद्यालय एवं एनी बेसेंट
कॉलेज में हुई. ७वीं कक्षा में आयोजित निबंध प्रतियोगिता में निर्णायक हिंदी के
प्रकांड विद्वान पंडित विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने कशी हिंदू विश्वविद्यालय के
स्नातक छात्रों के समकक्ष आपकी प्रतिभा को सम्मान दिया.
स्नातक की अधूरी पढाई करने के बावजूद आपने गहन अध्यवसाय
से अपनी साहित्यिक क्षमताओं का विकास किया. सन् १९३७ से रचनाओं का प्रकाशन क्रम
आरम्भ हुआ. बालक, क्षत्रिय मित्रा, राजपूत आदि पत्रिकाओं में प्रारंभिक कृतियों को
स्थान मिला.
प्रसाद,निराला, प्रेमचंद्र,महादेवी वर्मा,
जैनेन्द्र, शांतिप्रिय द्विवेदी आदि साहित्यिक विभूतियों का सानिध्य शैशावस्था से
ही प्राप्त हुआ.पारिवारिक एवं निजी जीवन की जटिलताओं के बावजूद लेखन-क्रम रुका
नहीं.
अन्नुतरे, मृगमद, अश्रुवीथी, गूंगा समुद्र, अग्निझर,
वरदान के शव, अग्नि वेणु, अश्रु शिंजिनी, अश्रु-पात्र, अश्रुछाया, अक्षरों के
अंतरिक्ष, अरण्य-ज्योत्सना आदि काव्य ग्रन्थ; खामोश रिश्ते, भींगी रात, आशी आदि
उपन्यास; रात के आंसू, सांवले बादल, आदि कहानी संकलन; कापालिक, जलती लक्ष्मण रेखा
आदि नाटक; एलोरा, फिरको आदि नृत्य नाटिका.
आपके रचना-संसार का बहुलाष अप्रकाशित है.
अभिज्ञान परिषद, रांची के द्वारा १४ मई, १९९४ को
महात्मा गाँधी की पौत्री श्रीमती सुमित्रा कुलकर्णी के कर-कमलों से साहित्य गौरव
अलंकरण से सम्मानित किया गया. ४ मई, २००७ को इनके काव्य ग्रन्थ “ अमृतेय बुद्ध” को
झारखंड के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान राधाकृष्ण पुरस्कार से अलंकृत किया गया.

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